संक्षेप में: Crown (cap) कमज़ोर या root canal किए हुए दांत को ढककर उसकी मज़बूती लौटाता है। Bridge टूटे हुए दांत की जगह भरता है, दोनों तरफ़ के दांतों का सहारा लेकर। दोनों lab में बनते हैं और चिपकाए जाते हैं — इन्हें निकाला नहीं जाता।
Crown कब ज़रूरी होता है?
- Root canal के बाद। RCT किया हुआ पीछे का दांत भुरभुरा हो जाता है और चबाते समय टूट सकता है — और टूटी जड़ अक्सर बचाई नहीं जा सकती। यह अतिरिक्त ख़र्च नहीं, आपके किए गए इलाज की सुरक्षा है
- बहुत बड़ी filling हो। जब दांत में filling ज़्यादा और दांत कम बचे, तो बची हुई दीवारें कभी न कभी टूटती हैं
- दांत में दरार हो। Crown टुकड़ों को जोड़े रखता है और दरार बढ़ने से रोकता है
- दांत का बड़ा हिस्सा टूट गया हो
- दांत पीसने से बहुत घिस गया हो
- Bridge का सहारा बनाने या implant पर लगाने के लिए
Crown किस चीज़ का बनवाएँ?
Zirconia
बहुत मज़बूत, दांत के रंग का, धातु-रहित। आजकल का layered zirconia आगे के दांतों के लिए भी अच्छा दिखता है और molars के लिए काफ़ी मज़बूत है। ज़्यादातर मरीज़ों के लिए यही हमारी पहली सलाह होती है।
All-ceramic (E-max आदि)
प्राकृतिक enamel जैसी चमक और पारदर्शिता — आगे के दांतों के लिए सबसे अच्छा। Zirconia से थोड़ा कम मज़बूत, इसलिए दांत पीसने वालों के molars में सावधानी से इस्तेमाल करते हैं।
PFM (धातु पर ceramic)
धातु के ढाँचे पर ceramic। लंबा और भरोसेमंद रिकॉर्ड, पर सालों बाद मसूड़ा पीछे हटने पर किनारे पर काली लकीर दिख सकती है। पीछे के दांतों के लिए किफ़ायती विकल्प।
पूरी धातु
सबसे मज़बूत और इसमें दांत सबसे कम घिसता है। दिखने की वजह से आगे के दांतों में नहीं, पर आख़िरी molar के लिए आज भी समझदारी भरा विकल्प है।
Bridge क्या होता है?
Bridge खाली जगह के दोनों तरफ़ के दांतों को सहारा बनाकर गैप भरता है। सहारा देने वाले दांतों को crown के लिए घिसा जाता है, और बीच का नक़ली दांत उनसे जुड़कर एक ही इकाई बन जाता है, जो चिपका दी जाती है।
समझने वाली बात: conventional bridge लगाने के लिए दोनों सहारा दांतों से enamel स्थायी रूप से हटाना पड़ता है। अगर उन दांतों में पहले से crown या बड़ी filling है, तो इसमें कोई अतिरिक्त नुक़सान नहीं और bridge बढ़िया विकल्प है। लेकिन अगर वे बिल्कुल स्वस्थ हैं, तो implant उन्हें छुए बिना काम कर देता है — ऐसे में हम आमतौर पर implant की सलाह देते हैं।
कितनी sittings लगती हैं?
- जाँच और X-ray — यह पक्का करने के लिए कि दांत और उसकी हड्डी ठीक है
- दांत तैयार करना — local anaesthesia में दांत को आकार दिया जाता है, impression लिया जाता है और अच्छी रोशनी में आपके बाक़ी दांतों से रंग मिलाया जाता है
- अस्थायी crown उसी दिन लगाया जाता है
- Crown लगाना — लगभग एक-दो हफ़्ते बाद। चिपकाने से पहले fit, बग़ल के दांतों से संपर्क, bite और रूप जाँचा और सुधारा जाता है। Try-in पर ज़रूर बोलें अगर आकार या रंग सही न लगे — तब बदलना आसान है, चिपकाने के बाद नहीं
Crown और bridge के साथ रहना
- लगने के बाद एक-दो हफ़्ते ठंडे की हल्की झनझनाहट सामान्य है
- अगर bite ऊँची लगे — यानी मुँह बंद करते समय वही दांत पहले लगे — तो वापस आएँ। दो मिनट का काम है, और छोड़ देने पर दर्द होता है और crown टूट सकता है
- Bridge के नीचे सफ़ाई ज़रूरी है। रोज़ superfloss या interdental brush नक़ली दांत के नीचे से निकालें। वहाँ फँसा खाना मसूड़ों की सूजन और सहारा दांतों में कीड़े का कारण बनता है — यही bridge के ख़राब होने की सबसे आम वजह है
- Crown में कीड़ा नहीं लगता, पर उसके नीचे का असली दांत किनारे से सड़ सकता है
- Crown वाले दांत से बर्फ़, सख़्त मेवे और हड्डी न चबाएँ
कितने साल चलते हैं?
दस से पंद्रह साल आम है, और अच्छी सफ़ाई तथा नियमित जाँच के साथ इससे कहीं ज़्यादा भी। जो चीज़ें इन्हें ख़त्म करती हैं — किनारे पर कीड़ा, मसूड़ा पीछे हटना और दांत पीसने से टूटना — तीनों काफ़ी हद तक आपके नियंत्रण में हैं।
जबलपुर में crown और bridge
Zirconia, all-ceramic, PFM और धातु के crowns तथा fixed bridges मदन महल स्थित हमारे क्लिनिक में बनवाए जाते हैं, प्राकृतिक रोशनी में shade matching और चिपकाने से पहले पूरी bite जाँच के साथ। अगर आपका crown या bridge निकल गया है, तो उसे सँभालकर साथ लाएँ — हाल में निकला हुआ crown अक्सर दोबारा चिपकाया जा सकता है।
