संक्षेप में: Professional whitening चाय, कॉफ़ी, तंबाकू और पान के दाग़ हटाकर दांतों को कई shade तक हल्का कर सकती है। यह स्थायी नहीं है, crowns और fillings का रंग नहीं बदलती, और सही तरीक़े से करने पर enamel को नुक़सान नहीं पहुँचाती।
दो अलग समस्याएँ जो एक जैसी दिखती हैं
ऊपरी दाग़ (extrinsic stain)
चाय, कॉफ़ी, तंबाकू, पान, सुपारी और गहरे रंग के खाने के कण enamel की बाहरी परत पर जम जाते हैं। इसके लिए professional scaling और polishing ही काफ़ी होती है — अक्सर सिर्फ़ सफ़ाई से ही दांत बहुत बेहतर दिखने लगते हैं और whitening की ज़रूरत ही नहीं पड़ती।
अंदरूनी रंग (intrinsic discolouration)
Enamel के नीचे का dentine स्वाभाविक रूप से पीला होता है, और उम्र के साथ गहरा होता जाता है जबकि enamel पतला होता जाता है। कुछ रंग जन्म से होते हैं — बचपन में ली गई tetracycline से पड़ी धारियाँ, ज़्यादा fluoride से fluorosis, या चोट के बाद मरे हुए एक दांत का कालापन। Bleaching इसी पर काम करती है।
आपकी समस्या कौन सी है, यह तय करता है कि क्या काम करेगा — और यह जाँच से ही पता चलता है।
Whitening काम कैसे करती है?
सक्रिय तत्व hydrogen peroxide या carbamide peroxide होता है। यह enamel के अंदर पहुँचकर दांत में फँसे बड़े रंग के अणुओं को तोड़कर छोटे और रंगहीन कर देता है। यह पेंट नहीं है और इससे दांत की कोई परत नहीं छिलती।
विकल्प
Clinic में whitening
मसूड़ों को सुरक्षा परत से ढककर तेज़ gel लगाया जाता है, एक ही appointment में दो-तीन चक्र, कुल लगभग 60 से 90 मिनट। नतीजा तुरंत दिखता है। अगर कोई कार्यक्रम आने वाला है तो यही सही विकल्प है।
घर के लिए trays
आपके दांतों के नाप के custom trays बनाए जाते हैं, जिनमें हल्के gel के साथ एक-दो हफ़्ते तक रोज़ तय समय पहनना होता है। समय ज़्यादा लगता है पर नतीजा अक्सर ज़्यादा एकसमान और टिकाऊ होता है, और trays बाद में touch-up के लिए आपके पास रहती हैं।
दोनों साथ
गहरे दाग़ के लिए हम अक्सर clinic में एक sitting और उसके बाद trays की सलाह देते हैं।
Internal bleaching
जिस एक दांत का root canal हुआ है और वह काला पड़ गया है, उसमें bleaching agent दांत के अंदर ही कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया जाता है। इस ख़ास समस्या के लिए यही तरीक़ा काम करता है।
Whitening क्या नहीं कर सकती
- Crowns, veneers, bridges और fillings का रंग नहीं बदलती। अगर आगे के दांत पर सफ़ेद filling है और आप whitening करवाते हैं, तो वह filling अचानक दांत से गहरी दिखने लगेगी और बदलवानी पड़ सकती है। क्रम सही रखें: पहले whitening, फिर नई filling का रंग मिलाना
- भूरे-स्लेटी दांतों पर कम असर करती है। पीला और भूरा रंग सबसे अच्छा जाता है; tetracycline वाला स्लेटी रंग धीरे और अधूरा जाता है — वहाँ veneers ही ईमानदार जवाब हो सकते हैं
- स्थायी नहीं है। आपके खान-पान और तंबाकू के इस्तेमाल पर निर्भर करते हुए एक से तीन साल
- असीमित सफ़ेदी नहीं देती। हर दांत की एक प्राकृतिक सीमा है। उससे आगे जाने की कोशिश से सिर्फ़ झनझनाहट मिलती है
क्या यह सुरक्षित है?
Dentist की देखरेख में की गई whitening का सुरक्षा रिकॉर्ड लंबा और अच्छा है। मुख्य दुष्प्रभाव ठंडे की अस्थायी झनझनाहट है, जो कुछ दिनों में चली जाती है; पहले से दो हफ़्ते desensitising toothpaste इस्तेमाल करने से यह काफ़ी घट जाती है।
ख़तरा तब है जब यह बिना देखरेख के किया जाए। बाज़ार की kits की ढीली trays से gel मसूड़ों पर बहकर जलन पैदा करता है। Charcoal powder और नींबू-सोडा जैसे घरेलू नुस्ख़े या तो घिसने वाले हैं या तेज़ाबी — ये enamel को सचमुच घिसा देते हैं, जो वापस नहीं आता, और नीचे का पीला dentine और दिखने लगता है। यानी लंबे समय में दांत और ख़राब दिखते हैं।
हम गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान, तथा जिन बच्चों के दांत अभी बन रहे हों, उनमें whitening नहीं करते। कीड़ा और मसूड़ों की बीमारी का इलाज पहले ज़रूरी है।
नतीजा बनाए रखने के लिए
- पहले 48 घंटे गहरे रंग के खाने-पीने से बचें — यह समय बाद की किसी भी सावधानी से ज़्यादा मायने रखता है
- ठंडे रंगीन पेय straw से पिएँ
- चाय-कॉफ़ी के बाद पानी से कुल्ला करें
- तंबाकू और पान नतीजे को सबसे तेज़ी से ख़त्म करते हैं
- छह महीने की सफ़ाई जारी रखें और trays से touch-up करते रहें
जबलपुर में teeth whitening
Clinic whitening, घर के लिए custom trays और काले पड़े एक दांत के लिए internal bleaching — सब मदन महल स्थित हमारे क्लिनिक में उपलब्ध हैं। हम जाँच और shade record से शुरू करते हैं ताकि आपको असली before-after दिखे। और अगर सिर्फ़ scaling-polishing से काम बन रहा हो, तो हम आपको वही बताएँगे।
